अधिगम ( Learning )


अधिगम क्या है

व्यवहार में परिवर्तन ही अधिगम है।

व्यवहार में परिवर्तन तीन प्रकार के होते हैं। ब्लूम के शैक्षिक उद्देश्य –

  1. संज्ञानात्मक
  2. भावात्मक
  3. क्रियात्मक

    सन उन्नीस सौ पांच में विलियम मैक ड्यूगल ने व्यवहार शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम अपनी पुस्तक द आउटलाइन ऑफ़ साइकोलॉजी में किया ।

    सन 1913 में जेबी वाटसन ने व्यवहार शब्द प्रस्तुत किया अतः उन्हें व्यवहारवाद का जनक कहा जाता है

    अनुभव ,प्रशिक्षण तथा अभ्यास-

    इन तीनों के माध्यम से व्यवहार में परिवर्तन अधिगम कहलाता है और यदि कोई व्यक्ति है जिसका स्वास्थ्य खराब हो जाए या वह परिपक्वता आ जाए या मानसिक परिवर्तन हो जाए या अन्य वजहों से संवेगात्मक परिवर्तन होता है उसे अधिगम कहा जाएगा

अधिगम प्रक्रिया या अधिगम के चरण या अधिगम के लक्ष्य

  1. आवश्यकता
  2. लक्ष्य
  3. समायोजित
  4. परिवर्तन

Planning (Goal )

  • बाधाएं
  • सफलता प्रयास
  • असफल प्रयास

अधिगम की परिभाषाएं-

Gardner Murphy-
अधिगम के अंतर्गत वातावरण की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए समस्त परिमार्जन समाहित रहते हैं

Wood worth-
अधिगम विकास की एक प्रक्रिया है।

” नवीन ज्ञान तथा नवीन प्रतिक्रियाओं के अर्जन की प्रक्रिया को अधिगम की प्रक्रिया कहते हैं”

क्रो एवं क्रो-
आदतों, ज्ञान, अभिवृत्तिओं का अर्जुन अधिगम है

स्किनर
अधिगम व्यवहार में उत्तरोत्तर अनुकूलन की एक प्रक्रिया है।

गिलफोर्ड
व्यवहार के द्वारा व्यवहार में आया कोई भी परिवर्तन अधिगम कहलाता है।

अधिगम के प्रकार-
गामक अधिगम ( गति करते हुए) इसमें बच्चा शारीरिक क्रियाएं करते हुए सीखता है यह स्थिति शैशवावस्था अवस्था में पाई जाती है।
प्रतिबोधात्मक- इसमें बच्चा संप्रत्यय निर्माण
बाल्यावस्था -प्रयास एवं त्रुटि
संकल्पनात्मक अधिगम- यह स्थिति किशोरावस्था में पाई जाती है इसमें सूझबूझ विधि का प्रयोग किया जाता है।
संकल्पनिर्माण –

अधिगम के प्रकार-
1 स्मृति स्तर का शिक्षण(memory Lev
Level of learning

  1. अबोध का शिक्षण
  2. चिंतन स्तर का शिक्षण (reflective level of
    Learning)

आर ए गैने ने अधिगम को 8 भागों में विभाजित करके अष्टपदी सोपानकी प्रस्तुत की।

  1. समस्या समाधान problem solving
  2. संप्रत्यय अधिगम concept learning
  3. सिद्धांत अधिगम principle learning
  4. बहुविभेद अधिगम
  5. शाब्दिक अधिगम
  6. श्रंखला अधिगम chain learning
  7. उद्दीपन अनुक्रिया अधिगम S-R learning.
  8. संकेत अधिगम ( signal learning)

अधिगम को प्रभावित करने वाले कारक

  1. पूर्व अधिगम
  2. विषय वस्तु अधिगम
  3. शारीरिक स्वास्थ्य एवं परिपक्वता अधिगम
  4. मानसिक स्वास्थ्य
  5. अधिगम की इच्छा
  6. थकान
    7.अभिप्रेरणा
  7. वातावरण

सीखने की विधियां-
डेविड ओस्विल ने अधिगम को चार भागों में विभाजित किया
अधिग्रहण अधिगम –
अध्यापक बोलकर यह लिखवाकर ही सिखाता है

अन्वेषण अधिगम
डिस्कवरी खोज करते हुए सिखाता है

रिटन्तु अधिगम
अर्थपूर्ण अधिगम-
जब अध्यापक का पूर्व ज्ञान के साथ नया ज्ञान जोड़ दिया जाता है तो इस प्रकार के अधिगम को अर्थपूर्ण अधिगम कहते हैं।
सीखने के वक्र- अभ्यास द्वारा सीखने की मात्रा गति व प्रगति की सीमा को चित्रांकित रुप से ग्राफ पर प्रदर्शित करते हैं।
सरल रेखीय( समान उपलब्धि) वक्र रेखिए त्वरण वक्र- इसमें समय प्रयास के साथ अधिगम की मात्रा समान होती है।
उन्नतोदर वक्र या घटनशील वक्र ऋणात्मक वक्र- अथवा कानवेक्स वक
इसमें समय व प्रयासों के साथ अधिगम की मात्रा धीरे-धीरे कम होने लगती हैं तथा अंत में क्षैतिज रेखा प्राप्त करता है इसे अधिगम का पठार कहते हैं या इंगित करता है कि अब समय देने के बाद भी कोई उन्नति नहीं होगी।
व्यवहारिक परिस्थिति में इसी प्रकार का वकृ देखने को मिलता है।
वास्तव में अंतरण न होकर अंतरण की स्थिति को दर्शाता है इसी कार्य करने की योग्यता व कौशल अन्य कार्य को करने की योग्यता पर कोई प्रभाव नहीं डालता तो इसे सुनने अधिगम अंतरण कहते हैं।

क्षैतीज अंतरण होरिजोन्टल
ट्रांसफर ऑफ़ लर्निंग-
एक प्रकार की परिस्थिति में अर्जित ज्ञान व अनुभव अथवा प्रशिक्षण का उपयोग व्यक्ति के द्वारा उसी प्रकार के लगभग समान परिस्थिति में किया जाता है तो उसे सीखने का क्षैतिज अधिगम कहते हैं।

Example-
कक्षा 8 में सीखा गया ज्ञान एक दूसरे में सहायता देता है स्कूटर मोटरसाइकिल।

उर्ध्व अधिगम अंतरण या अनुलंबी स्थानांतरण लोंगिट्यूडल-
जब एक परिस्थिति में अर्जित ज्ञान किया कौशल अनुभव का प्रयोग उच्चस्तरीय परिस्थिति में किया जाता है तो इसे उर्ध्व अधिगम अंतरण कहते हैं।
उदाहरण
कक्षा 8 में सीखा गया ज्ञान कक्षा 10 में प्रयोग किया जाता है स्कूटर चलाने वाले व्यक्ति का कार चलाना है।
साइकिल चलाने वाली लड़की का स्कूटी चलाना।

पार्श्विक स्थानांतरण (अधिगम अंतरण)
जब शरीर के एक अंग द्वारा अर्जित ज्ञान कार्य कुशलता उसी अंग की दूसरी संबंधित कार्य कुशलता को प्रभावित करती है तो इसे पार्श्विक या एकपक्षीय स्थानांतरण कहते हैं ।
उदाहरण
दाएं हाथ से हिंदी लिखने की कुशलता का उसी हाथ से संस्कृत लिखने में सहायता होना। दाएं हाथ से बैडमिंटन खेलना तथा दाएं हाथ से ही टेनिस खेलना, प्यानो बजाने का कौशल का टाइपिंग में प्रयोग।

द्विपार्श्विक अधिगम स्थानांतरण
जब मानव शरीर के 1 अंग द्वारा अर्जित कार्यकुशलता दूसरे अंग द्वारा प्रयोग किया जाता है तो इसे द्विपार्श्विक अधिगम अंतरण कहते हैं।
उदाहरण
एक व्यक्ति दाएं हाथ से खेलना जानता है परंतु आवश्कता पड़े तो बाएं हाथ से भी खेलना सीख लेता है।

अधिगम अंतरण का महत्व

  1. उदाहरण सहित पाठ को पढ़ाना चाहिए।
  2. दैनिक जीवन से जोड़कर पाठ्यवस्तु को पढ़ाना चाहिए।
  3. विशिष्ट जानकारी की उपेक्षा अध्यापक को सामान्य जानकारी पहले देनी चाहिए।

अंतरण की दशाएं-

  1. पूर्व अधिगम
  2. सीखने वाले की इच्छा
  3. सीखने वाले की मानसिक स्थिति
  4. सीखने वाले की सामान्यीकरण की योग्यता

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