भारत की जलवायु एवं वर्षा , मिट्टियाँ

भारत की जलवायु एवं वर्षा

भारत में उष्णकटिबंधीय मानसून प्रकार की जलवायु पायी जाती है ।

भारत में चार प्रकार की ऋतुएं पायी जाती हैं।

मानसून पूर्व होने वाली वर्षा को असोम में चाय वर्षा, बंगाल ये काल वैशाखी, केरल में आम्र वर्षा एवं कर्नाटक में काफी वर्षा एवं चेरी ब्लासम कहा जाता है।

उत्तर-पश्चिम भारत में भीष्म ऋतु में चलने वाली शुष्क हवाओं को लू (Lo) कहते है।

भारत में सबसे अधिक वर्षा वाला स्थान मासिनराम (मेघालय) है।

भारत में सबसे कम वर्षा वाला स्थान लेह (जम्मू कश्मीर) है।

भारत में सबसे अधिक वर्षा दक्षिण पश्चिम मानसून से होती है।

लौटते हुए मानसून से तमिलनाडू (कोरोमण्डल तट) में वर्षा होती है।

ओडिशा राज्य में सर्वाधिक प्राकृतिक आपदाएं आती है।

देश के पहले आपदा प्रबन्धन प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना लातूर (महाराष्ट्र) में
की गई है।

भारत में 8 प्रकार की मितियां पाई जाती हैं।
ये है-1. जलोढ़ मिट्टी 2. काली मिटी 3 लाल मिट्टी 4. लैटेराहट मिट्टी 5, मरुस्थलीय मिट्टी 6, पर्वतीय मिटी 7. लवणीय या क्षारीय मिट्टी 8, अम्लीय या तेजाबी मिट्टी।

जलोढ़ मिट्टी का निर्माण नदियों द्वारा किया गया है। इसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस
की कमी होती है।
भारत में सर्वाधिक विस्तार जलोढ़ मिट्टियों का है।काली मिट्टी का निर्माण बेसाल्ट चट्टानों (ज्वालामुखी क्रिया) से हुआ है।
काली मिट्टी को रेगुर तथा कपास वाली मिट्टी कहा जाता है।
काली मिट्टी को स्वत: जुताई वाली मिट्टी भी कहा जाता है।

काली मिट्टी को रेगुर व कपास वाली मिट्टी कहा जाता है ।

लौह-ऑक्साड के कारण मिट्टी का रंग लाल होता है।
लाल मिट्टियों में लौह एवं एल्युमीनियम अत्यधिक मात्रा में पाया जाता है।

लैटेराइट मिट्टी में लौह एवं सिलिका की अधिकता पाई जाती है।
चाय की खेती के लिए लैटेराइट मिट्टी सर्वाधिक उपयुक्त मिट्टी होती है।

स्थलीय मिट्टी में ज्वार, बाजरा, रागी, तिलहन (मोटे अनाज) की कृषि की
जाती है।

पर्वतीय मिट्टी में बागानी कृषि की जाती है। इसमें चाय, कहवा, मसाले
आदि फसलें उत्पादित की जाती है।

लवणीय एवं क्षारीय मिट्टियों को रेह, कल्लर या ऊसर कहा जाता है।

जैविक एवं कार्बनिक पदार्थों की अधिकता वाली मिट्टी को पीट या जैविक मृदा

बलुई मिट्टी में जलधारण क्षमता सबसे कम तथा चिकनी मिट्टी में सबसे
अधिक होती है ।

आलीय या तेजाबी मिट्टी (Acidie Soil) को कृषि योग्य बनाने के लिए
सामान्यत: चूने (Lime) का प्रयोग किया जाता है।
क्षारीय मिट्टी को कृषि योग्य बनाने के लिए जिप्सम का प्रयोग किया जाता है।

मरुस्थलीय समस्याओं के समाधान एवं सुधार के लिए जोधपुर (राजस्थान) में
सेण्ट्रल एरिड जोन रिसर्च इन्स्टीट्यूट (CAZRI) की स्थापना की गई है।

भारत की कृषि

भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ की 58% जनसंख्या कृषि कार्य में लगी

भारत की कुल भूमि के 61% भाग पर ही कृषि कार्य किया जाता है।

हवा में पौधों को उगाने की क्रिया एरोपोर्टिक कहलाती है।

मदारहित कृषि या जल में पौधों को उगाने की क्रिया हाइड्रोपोनिक्स कहलाती है।

रबी की फसलों के अन्तर्गत, गेहूँ, जी, चना, सरसों, राई, मटर विभिन्न प्रकार की कृषि क्रान्तियाँ
आदि की कृषि की जाती है।

खरीफ की फसलों में धान, गन्ना, अण्डा उत्पादन
बाजरा, मक्का, कपास, ज्वार पीली क्रान्ति तिलहन उत्पादन
आदि की कृषि की जाती है।

उड़द, मूंग, तरबूज, खरबूजा, खीरा तथा ककड़ी आदि जायद

क्रान्ति का नाम विशिष्टता

हरित क्रान्ति —खाद्यान्न उत्पादन
श्वेत क्रान्ति- दुग्ध उत्पादन
नीली क्रान्ति- मत्स्य उत्पादन की फसलों के अन्तर्गत आती है।

भूरी क्रान्ति- उर्वरक उत्पादन ,बायोडीजल उत्पादन
टमाटर/मांस उत्पादन- लाल क्रांति
गुलाबी क्रान्ति— झींगामछली उत्पादन
बादामी क्रान्ति –मसाला उत्पादन
सुनहरी क्रान्ति- फल उत्पादन
• विश्व में हरित क्रान्ति के जनकके रूप में नॉर्मन ई, बोरलॉग को जाना जाता है, जबकि एम. एस. स्वामीनाथन को भारत में हरित क्रान्ति का जनक माना जाता है।

भारत में हरित क्रान्ति की शुरुआत 1966-67 ई. में हुई थी।

सभी कृषि क्रान्तियों को समय रूप से इन्द्रधनुषी क्रान्ति के माध्यम से बल दिया
कृष्ण क्रान्ति

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